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जिन भक्तों पर गुरु की कृपा हो जाये उनका जीवन सफल हो जाता है स्वामी कृष्ण देव महाराज हरिद्वार 

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भूपतवाला स्थितसुप्रसिद्ध ब्रह्म निवास (उत्तरी) के पावन प्रांगण में आज अध्यात्म का एक ऐसा अनूठा समागम देखने को मिला, जिसने क्षेत्र के संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय और दिव्य ऊर्जा से सराबोर कर दिया।महामंडलेश्वर स्वामी परमात्मदेव जी महाराज की पतित पावन कृपा और उनके दिव्य संरक्षण में आयोजित इस विशाल संत समागम और भव्य भंडारे का सफल आयोजन बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस गौरवमयी अवसर पर सनातन धर्म के उच्च शिखर पर आसीन विभूतियों का सानिध्य प्राप्त हुआ, जिनमें प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर भागवत स्वरूप जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानन्द जी महाराज, स्वामी कृष्ण देव जी महाराज और महंत रवि देव जी महाराज जैसे महान संतों की गरिमामय उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और संतों के पावन पूजन के साथ हुआ, जिसके पश्चात उपस्थित संत महापुरुषों ने अपने पतित पावन श्री वचनों के माध्यम से भक्तों को निहाल किया। महामंडलेश्वर स्वामी परमात्म देव जी महाराज ने अपने अमृतमयी विचारों को साझा करते हुए कहा कि मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता ईश्वर के सुमिरन और संतों की निस्वार्थ सेवा में ही निहित है। उन्होंने सेवा भाव पर जोर देते हुए बताया कि ब्रह्म निवास की यह धरा सदैव से लोक कल्याण का केंद्र रही है और ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य समाज में धर्म की पुनः स्थापना और प्राणी मात्र में सद्भावना जागृत करना है। उनके साथ ही स्वामी कृष्ण देव जी महाराज ने अपने कल्याणकारी वचनों में भक्ति मार्ग की सुगमता पर प्रकाश डाला और कहा कि गुरु की कृपा ही वह नौका है जो जीव को इस भवसागर से पार लगाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सादगीपूर्ण और धर्मनिष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि समूचा परिसर संतों के जयकारों से गुंजायमान रहा और श्रद्धालुओं का हुजूम अपने प्रिय संतों के दर्शन मात्र के लिए आतुर दिखा। महंत रवि देव जी महाराज के कुशल संचालन और सेवा भाव के कारण यह विशाल आयोजन अत्यंत व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। समागम के उपरांत आयोजित विशाल संत भंडारे में हजारों की संख्या में साधु-संतों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा भाव से प्रसाद ग्रहण किया। इस पावन अवसर पर संतों के सानिध्य में ज्ञान की गंगा बही, जिसमें डुबकी लगाकर हर भक्त स्वयं को धन्य महसूस कर रहा था। अंत में महामंडलेश्वर स्वामी परमात्मदेव जी महाराज ने उपस्थित समस्त जनसमूह को अपना दिव्य आशीर्वाद प्रदान किया और विश्व कल्याण की मंगल कामना के साथ इस विशाल धर्म उत्सव का समापन हुआ। यह भव्य आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान था, बल्कि इसने सनातन संस्कृति की महानता और एकता का एक जीवंत संदेश भी जनमानस तक पहुँचाया। इस अवसर पर स्वामी कृष्ण देव जी महाराज ने कहा गुरु इस पृथ्वी लोक पर साक्षात ईश्वर की प्रतिमूर्ति होते हैं जो हम लोगों के मार्गदर्शन हेतु इस पृथ्वी पर अवतरित होते हैं उनका पतित पावन सानिध्य और मार्गदर्शन हमारे मानव जीवन को धन्य और सार्थक कर देता

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